जनसँख्या नियंत्रण कानून के लिए भारत बचाओ महारथ यात्रा के आगामी कार्यक्रम....           जनसँख्या नियंत्रण कानून के लिए भारत बचाओ महारथ यात्रा के तत्वाधान में विशाल जनसभा दिनांक : 18 फरवरी 2018 रविवार - ब्राम्हण सभा परेड ग्राउंड जम्मू शहर समय 10 बजे से सम्पर्क 9419109424, 9540391838            दिनांक : 18 फरवरी 2018 रविवार स्थान : दुर्गियाना मंदिर अमृतसर पंजाब समय 8 बजे शाम सम्पर्क 9888799688       चीजे खुद नहीं होती है, उन्हें करना पड़ता है .....
Sudarshan Rastra Nirman

हमारे बारे में

राष्ट्र निर्माण न्यास


राष्ट्र निर्माण न्यास एक स्वयंसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य भारतवर्ष को विश्व पटल पर एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है जो सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विश्व का नेतृत्व कर सके, विश्व गुरु की भूमिका निभा सके।   Show More

यह महायात्रा सम्पूर्ण भारत में जनसंख्या नियंत्रण कानून के  निर्माण हेतु जनजागरण का अभूतपूर्व विराट आयोजन है। Show More

  •       हिंदुस्तान जनसांख्यिकीय  असंतुलन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। इसके कारण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक अस्थिरता एवं अव्यवस्था की समस्या विकट होती जा रही है।
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    व्यक्ति , परिवार , समाज के सशक्तिकरण और देश के संपूर्ण विकास के लिए इस कानून की आवश्यकता है। यदि अनियंत्रित रूप से जनसंख्या विस्फोट जारी रहे तो कोई भी समाज और देश चाहे जितना विकास कर ले , उसकी बदहाली दूर नहीं हो पाएगी । अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और पारिस्थितिक संकट से अन्योन्याश्रय संबंध है। तमाम  कोशिशों के बावजूद मानव विकास सूची (Human Development Index) में भारत का प्रदर्शन दयनीय है।  

  •       भारत अभी भी श्रीलंका और मालदीव जैसे छोटे देशों से भी निचले स्तर पर 131 वें स्थान पर है। 
  •        उभरती अर्थव्यवस्था के मामले में 74 देशों में 62 वें स्थान पर है
  •        स्वास्थ्य सूचकांक के मामले में 195 देशों में 154 वें स्थान पर है  
  •       शिक्षा सूचकांक में 145 देशों में 92 वें स्थान पर है।

  • अन्य कई विकास सूचकांकों में यह  नेपाल, युगांडा और मालदीव  जैसे छोटे देशों से भी नीचे है। 
    जनसंख्या की यह वृद्धि दर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक विषमता, अशिक्षा, कुपोषण जैसी गंभीर समस् याओं की जननी है। आबादी की बढ़ती यह दर कभी भी भारत को विकसित देशों की श्रेणी में नहीं आने देगी । 
    इसलिए सभी नागरिकों के लिए चाहे वह किसी भी संप्रदाय ,क्षेत्र ,  जाति-संस्कृति से सम्बंधित हों एक समान जनसंख्या नीति की सख़्त जरूरत है।  देश में आज इस बात की आवश्यकता गंभीरता से महसूस की जा रही है कि  भारत सरकार संविधान की प्रस्तावना में दर्ज समानता और समाजवाद के उद्देश्यों के लिए राष्ट्रीय हित में एक कठोर और प्रभावशाली जनसंख्या क़ानून बनाये और उसे अविलम्ब लागू करे।   
    भारत दुनिया का पहला ऐसा देश था  , जिसने 1952 में सीमित परिवार के दर्शन पर आधारित जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की घोषणा की थी। फिर  अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार ने वर्ष 2000 में एक समग्र जनसंख्या नीति के निर्माण के लिए और 2. 1 की सकल प्रजनन दर की आदर्श स्थिति को 2045 तक प्राप्त करने के उद्देश्य से  जनसंख्या आयोग का गठन किया । इस आयोग के गठन के बावजूद जनसंख्या नियंत्रण हेतु अब तक कोई प्रभावशाली कदम नहीं उठाये जाने से वृद्धि दर और तेज हो गई है। ऐसे में     अगर स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो 2026 तक करीब 40-50 करोड़ अतिरिक्त जनसंख्या का दबाव हमारे सीमित संसाधनों पर बढ़ जाएगा। उस समय देश की स्थिति की भयावहता की कल्पना करना भी कठिन है।        
    अब समय आ गया है कि देश को जनसंख्या के इस विस्फोट से बचाने के लिए कठोर 'जनसंख्या नियंत्रण कानून'  निर्माण हेतु संसद, सरकार और राजनीतिक दलों पर जनदबाव बनाएं। आपका सम्पूर्ण सहयोग अपेक्षित है।